ए औरत! तेरा क्या कहना!

तू ही है संसार का गहना,

सारे ज़ख्म तूने मूक हो सहना,

अत्याचार में भी आता तुझे खुश रहना।


ए औरत! तेरा क्या कहना!

टहनी पर गाती है मैना,

तेरे बिन सूनी है जग की रैना,

उदास रहते हैं क्यूँ अक्सर तेरे नैना।


ए औरत! तेरा क्या कहना!

नदी भी सीखे तुझसे बहना,

हर कष्ट को कैसे ढहना,

हर दिन रोशन तुझसे, चेहरे पर तूने चाँद है पहना।