आवाज़ शांत हो जाती है तस्वीरों में

हम शांत हो जाते है नींद में

मैं रात को जागता हूँ एक सपने में

सपना जो खोल देता है आँखें जीवन में।

ये सब बातें अलग-अलग हैं

मुझे एक सी लगती हैं जाने क्यूँ,

कोई मिश्रण सा बनातीं हैं

एक गीत ये सुनाती हैं

मुझे प्यार से सहलाती हैं

मुझे शांत सा बनातीं हैं।


मुझे संशय है,

ये शांति कोई मतिभ्रम है

ये कहानी है जो मेरा अंतर्मन सिंच रहा,

जो उग रही है एक तस्वीर में

तस्वीर जो मैंने खींची है अपने सपने में,

मैं संग्रह करने के बावजूद विवश हूँ

ये अनभिज्ञता से मैं लिप्त हूँ,

हर बात का यूँ तो मुझे ज्ञान है

जाने क्यूँ इस बात से मन मेरा शांत है

मुझे कई दृश्य ये दर्शाती है

हमारी तस्वीर समुद्र में तैरती नज़र आती है।


एक टीस सी उठती जाती है

शांति मुझे घबराती है,

आँखें मूँद चुका हूँ बारहा

ये सिरहन विचित्र कुछ खनकाती है,

हमारे सपने जो अधूरे रह गए

उन्हें नींद क्यूँ नहीं आती है

जो पूरे हुए उनका क्या

मुझे समता की अधीनता डूबाती है,

ये असारता का प्रतीक है

मुझे शांति गले क्यूँ नहीं लगाती है

ये निस्तब्धता हमारी तस्वीर की

मुझे हर सम्त ले जाती है।