महकती हैं मेरी जिंदगी जिससे
खिलता हुआ ग़ुलाब हैं वो चेहरा।
ये जो मेरे लफ़्ज़ हैं चोरी के हैं
जिंदगी की क़िताब हैं वो चेहरा।
बहकता रहता हूं उसे देख देख
या अल्लाह लाज़वाब हैं वो चेहरा।
जिंदगी इश्क़ से रौशन हैं मेरा
सुब्ह का आफ़ताब हैं वो चेहरा।
जाने कैसे वो हुस्न को  संवारती हैं
रात में माहताब हैं वो चेहरा।