मुझसे होकर तो जाती है
मग़र तुझसे होकर नही आती
ये हवा भी मेरे ख़िलाफ़ चलती है।
सारा मोहल्ला हुआ रौशन
अंधेरा मेरे घर रह गया
ये रौशनी भी मेरे ख़िलाफ़ चलती है।
मैं अपने हिसाब से चलूं
या जमाने के हिसाब से चलूं
ये घड़ी भी मेरे ख़िलाफ़ चलती है।
मैं जिंदगी से हूं तंग
और अपनी मौत मांगता हूं
सांसे भी मेरे ख़िलाफ़ चलती है।
अब क्या कोई चले ना चले
जब अपना ही बस ना चले
ये चाहते भी मेरे ख़िलाफ़ चलती है।
पहले मैं चला था या
ये चाल तुम चली थी
ज़िन्दगी भी मेरे ख़िलाफ़ चलती है।
वो कहती है तुम ठहरो
अब मैं चलती हूं
बातें भी मेरे खिलाफ़ चलती है।