शिखर पर आकर जब सूर्यास्त होगी,
यही मेरी आख़िरी शिकस्त होगी।।
ना होगी माँ की ममता
ना पिता का साया
हर तरफ होगा उदासियों का साया
तब ख़ुद से ही मेरी जंग जबरदस्त होगी,
यही मेरी आख़िरी शिकस्त होगी।।
मेरा प्यार किसी और के आंगन होगा,
कोई और उनका साजन होगा,
वो बाहों में उसके मदमस्त होगी
यही मेरी आख़िरी शिकस्त होगी।।
छोड़ मेरा साथ मेरे अपने,
टूट जायेंगे सब मेरे सपने
जिंदगी टूट कर ग़मों से पस्त होगी,
यही मेरी आख़िरी शिकस्त होगी।।
मैं टूट कर ख़ुद को भुला दूंगा,
अपने वसूलों को ख़ुद ही मिटा दूंगा,
तबाह होगी दुनिया मेरी आँसुओं से,
मौत ही मेरी आखिरी शस्त्र होगी,
यही मेरी आख़िरी शिकस्त होगी।।