सूरज ढला पंछी भी लौट रहे आ घर चले। रात अँधेरा राह में होगा घना आ घर चले। मुसाफ़िर हैं सबके सब यहाँ आ घर चले। सुबह फिर निकलेंगें साथ में आ घर चले।