जिन्दगी मैं गर लिखूं, तुम माँ समझ लेना,
समन्दर का किनारा मैं लिखूं तुम माँ समझ लेना।
सुबह की ताज़गी लिखूँ या शाम की वो शांति,
सुकुं और चैन गर लिख दूँ, तुम माँ समझ लेना।।
-तरुण वीर सिंह


जिन्दगी मैं गर लिखूं, तुम माँ समझ लेना,
समन्दर का किनारा मैं लिखूं तुम माँ समझ लेना।
सुबह की ताज़गी लिखूँ या शाम की वो शांति,
सुकुं और चैन गर लिख दूँ, तुम माँ समझ लेना।।
-तरुण वीर सिंह