कुछ रंग बिरंगी तितलियाँ मेरी कलम की नोक से आज़ाद होकर मेरे सिर पर चढ़ कर बैठ गई हैं और मेरे आसपास अपने पंख फैलाए उड़ती रहती हैं मैंने अपने झरते कुछ काले बालों को एक डिबिया में बंद करके रख दिया है मैं उस डिबिया को तब खोलूंगी जब मेरे सारे बाल सफ़ेद हो जाएँगे अपनी मधुर स्मृतियों को कागज़ पर लिखकर एक बोतल में बंद करके मसूरी की सबसे ऊँची वाली चोटी से नीचे फेंक दिया है पुरानी किताब में से उस लाल रंग के गुलाब के फूल की सूखी हुई पँखुरिओं को क्रश करके गमलों में बो दिया है अब इंतज़ार है रंग बिरंगी तितलियों के शब्द हो जाने का..!! तरसेम