आज 'नेशनल गर्ल चाइल्ड डे' के अवसर पर अपने लेखन के शुरूआती दिनों में लिखी एक कविता साझा करना चाहूंगी । 


बिटिया की पढाई


मदद करो.. प्यार दो कुछ ,

हिम्मत दो.. हौसला दो कुछ ,

आशा दो..आश्वासन दो कुछ..

भरनी है उड़ान उन्हें ,

दे दो बस दो पंख उन्हें ,

नन्हे छोटे अपने हाथों से..

उठाई है कलम अभी ,

अपने लाचार माँ बाप के

आँखों का सपना है वो ,

प्यारी उनकी बच्ची है वो ,

दिखा दो उन सूनी आँखों को ,

डाल दो कुछ सपने कल के ,

उनकी खाली सी झोली में..

पढ लिख के बन जाए कुछ

बिटिया उनकी दुलारी सी..

आओ सब मिलके हाथ बढाये..

शिक्षा ही तो असली धन है ,

ये बताएं कुछ उन लोगों को..

बिटिया को जो पढायेंगे ,

असली कमाई कर जायेंगे ।

-तरसेम कौर