हमअकेले बहुत दूर चले आयें हैं
यादें अपनों के साथ लेकर आयें हैं
बात सिर्फ मेरी नहीं अपनों की है इसलिए
भरण-पोषण के वास्ते परदेस चले आयें हैं
कट रही है मेरी जिंदगी जिस हाल में
मेरे साथ रहने वाले ही जान पायें हैं
दिल मेरा करता है कभी-कभी
कि सब कुछ छोड़ कर भाग जायें
अपने देश में वापस जाकर
अपनों के साथ जिंदगी बितायें
फिर याद आती है मुझको
मेरे देश के बेरोजगारों की दशा
अपने देश को लूटने की
भ्रष्ट नेताओं का नशा
यूं देश में रहकर हम
बहुत कम ही कमा पायेंगे
आधे को खिला पायेंगे
तो आधे भूखे रह जायेंगे
जब एक बड़ी पूंजी कमा कर
देश वापस लौट आयेंगे
तो साथ अपनों के रहकर
हंसी-खुशी जिंदगी बितायेंगे।।
# Migrant_Worker


