चलो आज हम भी गरीब बन के दिखाते हैं।।

रोज रोज का नहाना बंद ही करते हैं,

बस मुंह धोकर ही काम चलाते हैं।

तन पर कपड़ा कम पहनते हैं

और परफ्युम से दूरी बनाते हैं।

चलो आज हम भी गरीब बन के दिखाते हैं।।

ब्रेकफास्ट गुल और लंच कम खाते हैं।

कुछ काम करने को तो है नहीं,

धूप में थोड़ी बहुत मशक्कत करके आते हैं।

चलो आज हम भी गरीब बन के दिखाते हैं।

थक गया हूँ थोड़ी देर में ही,

भूख भी है मुझको बेपनाह।

जूस नहीं,

गुड़-पानी, सत्तु का सेवन करके आते है।

चलो आज हम भी गरीब बन के दिखाते हैं।।

अब तो शाम हो चला है,

चाय का वक्त भी आ गया।

सिर्फ पानी पीकर ये रस्म भी निभातें हैं।

चलो आज हम भी गरीब बन के दिखाते हैं।।

डिनर का वक्त है,

दस्तरख़्वान भरा है,

वेज, नाॅनवेज, फ्रुट्स और पकवान से,

चलो आज भूखे ही रात गुजारते हैं।

गद्देदार बिस्तर छोड़, एसी बंद करते हैं।

खुली आसमान में छत पर ही सो जाते हैं।

चलो आज हम भी गरीब बन के दिखाते हैं।।

करवटें बदलते, तारे गिनते, गुजर गयी रातें पूरी, 

अब नहीं होगा जुल्म मुझसे,

मेरी ही जिस्म व जान से। 

शुक्र है खु़दा का, अमीर हुं मैं।

नोट, बंगला, गाड़ी और मकान से।

चलो आज हम भी गरीब बन के दिखाते हैं।।

आओ अब हम सब अहद लेते हैं,

दिल से और पूरे ईमान से।

एक मौका गरीबों को भी देते हैं,

इज्जत और सम्मान से।

उन्हें भी एक दिन का अमीर बनाते हैं।

अपने घर में सुकून और आराम से।।