खुदसे चाहकर भी तुझसे कुछ छुपा नही पा रहा मैं,
मेरे एल्फ़ाज़ों में मेरी ज़िंदगी बसती है, बता रहा हूँ मैं।
सवाल दर सवाल से परेशान न कर मुझे ए मेरे दोस्त
उम्मीद है अब जवाब एल्फ़ाज़ों में छुपा ना पाऊंगा मैं।
चेहरा, बस तेरा ही चेहरा नज़र आता है हर एक जगह
बस दिल की ये बात तुझे समझा नही पा रहा हूँ मैं
यूं तो मुहब्बत से रूठा बैठा था "तारिक" एक अरसे से
जो देखा तुझे ज्यूँ, बस मुहब्बत ही किये जा रहा हूँ मैं।।
#अनवर


