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मुहब्बत के दास्तान

खुदसे चाहकर भी तुझसे कुछ छुपा नही पा रहा मैं,

मेरे एल्फ़ाज़ों में मेरी ज़िंदगी बसती है, बता रहा हूँ मैं।


सवाल दर सवाल से परेशान न कर मुझे ए मेरे दोस्त

उम्मीद है अब जवाब एल्फ़ाज़ों में छुपा ना पाऊंगा मैं।


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