गुज़ारिश
काँटों से भी बुरी चुभन
देती है यह तन्हाई
ना जाने क्यों
याद तुझे कभी भी मेरी नहीं आई
हर जगह तस्वीर तेरी
सारे सुख तेरे, हर तकलीफ मेरी
मौसम बदले, पर तू ना आया
तरसती है देखने को तुझे आँखें
पर ना जाने क्यों, तू नज़र ना आया
चेहरा देखे हुए बीत गया अरसा
पर पहली किलकारी आज भी याद है
तू ना  याद रखे
पर मैं तेरी माँ, और तू मेरी औलाद है
आफत कहा तूने मुझे
इसका गम नहीं
सारे रिश्ते तोड़ चला तू
पहचान ना सका, क्या गलत क्या सही
वक़्त ना जाने क्यों यह पल  ले आया
देखते ही देखते दूर होता गया तेरा साया
रिश्ते की डोर रह गई कच्ची
पर गलती तेरी नहीं, शायद किस्मत मेरी ही नहीं थी अच्छी
रो रो कर सूख चुके मेरे आसूँ
पर आस आज भी हूँ  मैं लगाई बैठी
खून तू है मेरा , एक दिन वापस आएगा
प्यार के  दो पल मेरे साथ भी बिताएगा
बस देर ना हो जाये इतनी
की तू आये और मेरी साँसें ना हो
आशीर्वाद लेने  की कोशिश तू करे
पर मेरे हाथ उठने को राज़ी न हो