इम्तिहान तो यह ज़िदगी,लेती रहेगी,
परिणाम में गम-खुशी देती रहेगी,
मुस्कुराता रहेगा, जो हर हाल में यहाँ,
उसके जख्मों पर, यह ज़िदगी भी फिर मरहम लगाती रहेगी।
ख्वाबों में डूबा,एक और ख्वाब देखता है,
मज़िल के साथ, रोज़ राह भी बदलता है,
थक -हार कर फिर, निराश हो जाता है,
मानव आखिर तू! मुश्किलों से क्यों इतना घबराता है?
दृढ़- निश्चय, असीम-विश्वास रख,
चेहरे पर मुस्कान, साथ रख,
मन में उमंग, कर्म में ध्यान रख,
जज़्बा- जुनुन भी साथ रख।
मज़िल- फिर कोई एक नहीं,
समा जाए, जो इन निगाहों में,
मेहनत कुछ ऐसी हो,
कि हज़ारों मज़िले झुक जाए, तेरी राहों में।।