
इम्तिहान तो यह ज़िदगी,लेती रहेगी,
परिणाम में गम-खुशी देती रहेगी,
मुस्कुराता रहेगा, जो हर हाल में यहाँ,
उसके जख्मों पर, यह ज़िदगी भी फिर मरहम लगाती रहेगी।
ख्वाबों में डूबा,एक और ख्वाब देखता है,
मज़िल के साथ, रोज़ राह भी बदलता है,
थक -हार कर फिर, निराश हो जाता है,
मानव आखि
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