चुभे-कुछ ककड़-घाव बन पैरों में,
दिल की दुआ से,फिर उन्हें ही सलाम हो गया।
खामोशी से निगाहें,करती रहीं जो बयां,
खुदा की रहमत से, वह पल अदृश्य हो गया।
आए जो आँसू ,बन नयनों में खुशी,
फिर याद करते ही, खारा दीदार हो गया।
बोल दिए दो -लफ्ज़, जो अक्समात् उन्होंने,
अहम् फिर कैसे चूर हो गया।
राहों में चलते-चलते राही बदल गए ,
सुनाते-सुनाते अपनी ग्वाही बदल गए।
गैरों की क्या फरमाए, ए-हमसफर ,
चलते-चलते थोड़े हम भी तो बदल गए।
चलते-चलते रास्ते, कब मज़िल बदल गए,
थोड़े- हम थोड़े -तुम भी तो बदल गए।


