तुम होते तो ऐसा होता

तुम होते तो वैसा होता

खो क्या क्या सोचा हमने

तुम होते तो शायद सच होता

इन खेतों में तुम संग बैठे

हाथों में हाथ होता

हकीकत थोड़ी महंगी थी

वरना तो तू पास होता

इस झील को देखते घंटों तक

पर निगाह में तू होता

साए शायद दो होते

पर बाहर में बस हम होता ।


आज देख

कैसे बैठे हैं अकेले

हम कहां, तुम कहां

ये खेत, ये झील

बस सुना रही हैं सर्गोशियाँ

आज भी बाहर अकेला है

पर साए दो से दिखते हैं

आज देखूं चाहे जिस भी ओर

मुझे खुद में हम दिखते हैं ।।


~tanvi