कुछ बूंदे गिरी आसमान से आज यूँ इस कदर,
महक उठी धरती सारी, गीले थे अधर.
कुछ यूँ इत्र फैल गया इन साज़ों में आज
कुछ हँसे इसे देखकर, तो बहुत रोए थे आज,
शुरुआत हुई कुछ आंधी से, धूल खूब उड़ाई थी,
पर एक से ठंडे झौके के साथ बूंद-बूंद गिर आई थी.
टकराई धरती से एक-एक बूंद जब-जब,
मानो छू रही थी प्रेम से, वो झूम-झूमकर तब-तब,
कुछ नाचे इसकी मदहोशी में, कुछ गुमसुम हो गए,
ये बारिश थी बेरंगीन, मगर रंग खूब हो गए ।।
~tanvi

