राम चले , श्याम चले
सब छोड़ चले हैं नर वन को ,
पांडव , कौरव और विभीषण
न कोई बचे हैं दर्शन को ,
गोद में जाकर धरती की
मां सीता ने भी मौन धरा ,
अभिमानी रावण को देखो
क्षण भर में है ध्वस्त पड़ा ,
नामवर का नाम भी तो
क्षीण हुआ है पल भर में ,
न हस्ती बची , न बची पगड़ियां
केवल अंत बचा है अंतिम में ।।
~tanvi
