मैं कलाकार हुँ

अनदेखे रूप का आकार हूँ

मैं कल्पना का आधार हूँ

मैं कला और मन के बीच का प्यार हूँ

मैं वसन्त में पतझर

पतझर में कलियों की सौगात हूँ

मैं वो जो जिन्दगी के पहले

और जिन्दगी के बाद हूँ

मैं दो जहानो के बीच का एक

अकेला तार हूँ

मैं कलाकार हूँ |


मैं भरी महफ़िल में अजनबी

अजनबियों के बीच अपनो सा प्यार हूँ

कभी शर्म से ढकी तन हूँ

कभी खुले आसमान का मंज़र

मैं किसी की आबरु हूँ

तो कभी किसीके मन का सम्न्दर

मैं रातो की नर्मी हूँ

मैं सुबह की चहचहाहट

मैं सूरज की गर्मी हूँ

मैं चंदा की रोहिणी

मैं सबका प्यार हूँ

मैं अनजानेपन का आधार हूँ

मैं कलाकार हूँ |