अपने आप को बयां कर
कभी अपना प्यार खुद को दिया कर!
मत ढूंढ़ अपना जहाँ किसी और की आँखो में
कभी तन्हाई में अपने दिल को पढ़ा कर!
गैरो के ख्वाबों में तलाश रहा अपना पता
कभी अपने किसी सपने को खुद का ठिकाना बनाया कर!
किसी दिल के शिशमहल का दरवाजा खट-खटा रहा
कभी अपने मन की टुटी झोपड़ी को भी अपनाया कर!
दर-दर की ठोकरें खाता हैं प्यार भरे चन्द लम्हों के लिए
कभी सुकून से खुद के साथ कुछ वक्त बिताया कर!
बहुत शिकस्त खाई हैं मोहब्ब़त में
कभी खुद को अपना महबूब बनाया कर!
कभी अपना प्यार खुद पर लुटाया कर
चन्द लम्हें अपने साथ बिताया कर!


