तीनो सो रहे थे 

शोर हुआ बहुत 

ना ना हम जागे नहीं 

अंधेरा ही अंधेरा घेरे हुआ था 

दूर खुद ही से 

ना ना हम भागे नहीं 

खुल गया सारा राज 

आँखो में झाकने भर से 

ना ना हम यू तो धागे नहीं 

बेचनियों ने डूबा लिया 

परेशानियो ने उठा लिया 

ना ना हम इतने अभागे नहीं 

तारा