कुछ बातें मुझमें अनकहीं रही
तू ना है तो , तेरी यादें ही सही
कितनी बेबसी कितना खालीपन है
हंस-हंस के कहाँ बचा गम है
तुझसे लिपटने की चाहत
तेरी गोदी का प्यार
तेरे गुस्से का डर
तेरे हाथों की मार
तेरे पाँव की ठंडक
तुझसे रोज तीज त्यौहार
अब कैसी बेचैनी है
कैसी नादानी है
ना मन है, ना मनमानी है
तारा


