उससे अलग हो जाने के बाद से पता नहीं

मेरे ज़मीर में एक मलाल रह गया है।


गलती मेरी हो या उसकी, बात चाहे कुछ भी हो मगर

हम दोनों को मिले हुए एक लंबा अंतराल हो गया है।


उसकी दिलकश यादें इन दिनों कुछ इस कदर हावी हैं मुझ पर,

कि मेरे अंदर भरे हुए गुरूर का अब इंतक़ाल हो गया है।


इस आशिक़ का हाल इस वक़्त सिर्फ यही है,

कि तेरी रूह की ठंडक के बगैर यह जिस्म एक धधकती आग की मशाल हो गया है।