एक रोज़ भगवान ने सोचा कि उसकी उपस्थिति हर जगह कैसे हो सकती है? भले ही वो सर्वत्र है लेकिन हर जगह उस ऊपरवाले की ताकत काम नहीं करती इसलिए उसने तय किया माँ का आविष्कार करने के लिए और तब से यह बात सोलह आने सच हो बैठी कि माँ के दामन से ज़्यादा सुरक्षित जगह इस दुनिया में तो क्या इस ब्रह्मांड में कई नहीं है। इन पंक्तियों पर आधारित मैं कुछ बोलना चाहूँगा।
इस कायनात में रब ने बनाए मुफ़लिस हज़ार
जो है पूरी तरह से बेबस और लाचार।
लेकिन उसने केवल माँ को ही चुना जो धारण कर सकती है कभी अन्नपूर्णा का रूप,
तो कभी दर्शा सकती है बनकर दुर्गा, काली और चंडी का प्रहार।
भगवान ने भेजा हमारे लिए उसे दरिया पार करके,
एक योजना बनाई हमारी लीला आपरम पार करके।
रब चला गया उसे हमें प्रदान करके,
उसके बाद से वो आज भी जीती है केवल हमारे लिए अपनी खुशी और मुस्कुराहटों को निसार करके।।


