पीढ़ियों को जन्म देने का वरदान है वो ,
इस बात का गर्व उसको महसूस होता है I
जब उसके परिवार के किसी सदस्य को हानि पहुँचे ,
उनके घावों से ज्यादा उसका दिल रोता है I I
जब खाने के टेबल पर उसके अलावा सब करते हैं गपशप,
तब उसको भी अकेलापन महसूस होता है I
एक बार उसे बोलकर तो देखो कि आज पहले तुम खाना खा लो,
देखना उसका चेहरा कैसे खिल उठता है I I
अपनी छोटी छोटी खुशियों का गला घोंटकर जीती है वो अपना जीवन,
फरमाइशें पूरी न होने की कमी उसे भी ज़रूर खलती होगी I
हम सबको भरपेट खिलाकर खुद आधे पेट पर सोती है वो,
रात को भूख उसे भी लगती होगी I I
सामंजस्य, प्रेम और दीवानगी का प्रतीक है वो,
रब ने हम सभी के घर उसका यह अवतार भेजा है I
हर मुश्किल और दुःख की घड़ी में भर जाता है उसका दामन,
माँ का प्यार उसी वक़्त हमें महसूस होता है I I


