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चीन - विश्वहित के विरुद्ध

शुरू करते हैं 1962 में भारत और चीन के बीच हुए युद्ध से I


जब भारत के एक छोटे से हिस्से को लेकर तुमने दी थी हमारे देश में दस्तक,

उस हिस्से को हासिल करने के लिए तुमने तैयार करवा दिए भारत में कई स्मारक।


कई परिवार उजाड़कर, कई सहारे छीनकर तुमने जीत ली थी यह जंग,

जिनके बाद उन शहीदों के स्मारकों पर आज तक बजते हैं उनके नाम ढोल मृदंग।


यह सुनिश्चित है कि तुम सदा याद रखोगे हमारी तरफ से उन शहीद सिपाहियों की युद्ध में शिरकत,

बतौर रक्षक जिन्होंने तनिक भी न सोची अपने परिवार की और युद्ध का खिताब हासिल करने में लगा दी अपने जीवन भर की मेहनत मशक्कत।


जो फौलादी जिस्म पहुँचाना चाहे अपने परिवार को अपने नाम का पैगाम,

उसको करना पड़ता है लंबे अरसे का इंतज़ार क्योंकि वह तैनात है वाघा, अटारी और डोकलाम।


अपने तन मन से सख्त होकर भी उसको आती ज़रूर होगी याद अपने परिवार की,

परंतु उसे हमेशा प्राथमिकता देनी पड़ती है अपने देश को ताकि उस पर किसी प्रकार की कोई टिप्पणी ना आ जाएं कहीं महफूज़ बैठे किसी गद्दार की।


अब बात करते हैं वर्तमान काल की जब पूरी दुनिया चीन से उत्पन्न हुए कोरोना वायरस की वजह से बहुत ही मुश्किल समय से गुज़र रही है।


हाल ही में घोषित हुआ था कि

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