कुछ पल ,
जिनका बेसब्री से इंतज़ार था।
वो आये
और मैंने जिया उनको
मैंने पिया उनको
आज . .
वो लम्हे गुज़र चुके हैं
एक ख्वाब की तरह ,
एक हसीं एहसास की तरह ,
मैं हूँ . . और बस मैं हूँ
अपनी सांसों के साथ . .
अपने कुछ अरमानों के साथ
जिसे इंतज़ार है फिर से उन ख़ूबसूरत पलों का ,
उन ज़िंदादिल लोगों का,
के वो फिर से लौटेंगे
कुछ नयी कहानियां लेकर
कुछ नयी गर्मजोशियाँ लेकर
वक़्त फिर ख़ुशनुमा होगा।

