रुपए की माया

यह कैसी रुपए की माया है

हर व्यक्ति इसके पीछे पगलाया है

अब धूप है ना छाया है

भ्रष्टाचार को इस ने फैलाया है

रिश्वतखोर ने रिश्वत खाया है

यह कैसा आतंक किसने फैलाया है


इसके पीछे राजनेता बदनाम हुए

महंगे वस्तुओं के दाम हुए

भाई भाई का झगड़ा है

न जाने कितना इसके लिए लफड़ा है

हर व्यक्ति को इस ने पकड़ा है

जग में आतंक इसका तगड़ा है


अमीर के घर यह जाती है

गरीब को यह तड़पाती है

हर व्यक्ति को अपने जाल में फसाती है

फिर भी हिंदू में मां लक्ष्मी कहलाती है।

जिसने भी इसे धोखे से अपनाया है

वह अंत में जाकर पछताया है

यह कैसी रुपए की माया है। यह कैसी रुपए की माया है