मैंने देखे हैं, कुछ लोग.....
जो सब कुछ अपना बनाने की चाह में,
एक दिन सब कुछ खो बैठे ।
इतनी कठोरता से जीते - जीते,
खुद पत्थर से कठोर हो बैठे ।
अंत खुद के मुताबिक करने की चाह में,
वर्तमान ही खो बैठे ।
क्या करोगे मन चाहे अंत को पाकर,
यदि तब तक अपनों को ही खो बैठे ।।
ज्योति।।
