फ़र्ज की असली परिभाषा's image
Poetry1 min read

फ़र्ज की असली परिभाषा

Sweety मित्तलSweety मित्तल September 15, 2022
Share1 Bookmarks 61171 Reads2 Likes
फर्ज़ की असली परिभाषा मुझे माँ की आँखों में दिखाई देती है,
हर पल जिम्मेदारी उठाकर भी कभी उसकी आह ना सुनाई देती है,
देखती हूँ जब पापा के इन झुके हुए कंधों को तो मुझे वो सारे फर्ज़ याद आ जाते है,
बचपन से लेकर अब तक क्यों पापा सुबह जल्दी घर से निकल जात

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts