चलतेचलतेथक-सीगयीहूँ
थोड़ीदेरकहींरुकजाऊँ..
कड़ीधूप-सीजलेज़िंदगी
ठंडीछांवकहींतोपाऊँ..
किसकेकंधेपरसिररखूँ
पलभरकोहरदर्दभुलाऊँ..
आँखोंमेंचुभतेहैंसपने
बंदकरूँपरसोनपाऊँ..
उतनाहीदेदर्दखुदाया
हँसते-हँसतेजोसहजाऊँ..
बसअबऐसीराहदिखादे
जिसपरचलूँतुझेपाजाऊँ!!
-स्वीटीसिंघल/ @poetry@dilse


