बड़े दिनों बाद एक उम्मीद जगी है
तुमसे मिलके एक आस जगी है
अंधेरे में हो जैसे रोशनी की किरण
या किसी भूले को मिल जाए मंज़िल
तुमसे मिल के आंखों में आज वैसी ही नमी है
ख्वाहिशें फिर से जी उठी है
ख्वाबों को भी मिली एक नई जिंदगी है
लबों के कोनो पे हंसी फिर सजने लगी है
खामोशियां अब बोलने लगी है
लफ़ज़ों में भी एक झंकार सजी है
जाने यह क्या जादूगरी है
पुरानी यादें अब नए लम्हों से मिलने लगी है
सब घड़ियां नई यादें बनाने को तैयार खड़ी है
तुम जो आए साथ, जिंदगी फिर से जीने लगी है
_स्वाति शर्मा

