जो जैसा है, उसके वैसा होने से क्या नाराज़गीगम तो यह है के, वो हमें समझ न पाए।अब यह दलील ले कर जाए भी तो कहांदस्तूर यह है के उन ही के पास जाए...
जो जैसा है, उसके वैसा होने से क्या नाराज़गीगम तो यह है के, वो हमें समझ न पाए।
अब यह दलील ले कर जाए भी तो कहांदस्तूर यह है के उन ही के पास जाए...