फर्क कहाँ पड़ता है मुझको कहाँ धरा ये प्यासी है हाँ जरा सा दिल टूटा है औ थोड़ी सी मायूसी है कौन कहा हम राह तक रहे छोड़ो तुमको भूल गए बस थोड़ी सी बेचैनी है औ थोड़ी ख़ामोशी है