अधिकारो को माँग रही क्यों विचलित होते हो
अबला के सबला बनने पर कैसे आपा खोते हो
गीदड़ के झुण्डो ने देखो शेरनियों पे वार किया
मर्यादा को भूल गये मानवता को तार-तार किया
जननी है अबला है जुल्मों को सहने की शक्ती है
मत भूलो ये अबला ही वेद पुराणो की चण्डी है
बेसक तुम कायर हो अधिकार नहीं दे पाओगे
किस मुँह से अपनी बहनो को साहस दिलवाओगे
अभी तो ये आरंभ हुआ है इंतजार अब जीतो का
बस अब बदला लेना है हर दामिनी के चीखो का


