लिखना चाहता हूँ कुछ तुम पर, जो दिल में बोझ सा है मुझ पर कहनी थी वो बात जो बढ़ गयी है थोड़ी दिल और थोड़ी चढ़ी सर पर नहीं ये रामयाण नही बनेगी यकीन कर वैसी ये कोई कृति नही यह मानकर चल पड़ी है कुरुक्षेत्र युद्ध स्तर पर रुकेगी हे कृष्ण सत्य की विजय पर प्रेम सर्वोपरि है तू भी प्रेम अब कर थक जायेगा जब असत्य हारकर मैं दिखालाऊंगा तुम्हे जीतकर ।