किसी की कहानी बन गयी गजल, किसी कीचड में खिल गए कमल, उस किसान की जल गयी फसल, बुरा ना मानो पर, नही तुम्हे अक्ल ।
तुम्हारे हर सवाल का नही कोई हल, गुजर गया समय है बीता हुआ कल , मन में बसे तुम जो है बहुत चंचल, सबको है पता, नही तुम्हे अक्ल । हम ठहरे गंवार और बुरी है शकल, पढ़ भी न पाए न कर सके नक़ल, तुम्हारा नाम जपते बीते सारे पल, क्या करोगे जानकर, नही तुम्हे अक्ल । नाम किया तुम्हारे आने वाला कल, तुम उड़े ऊँचे ऐसे दूर हुआ भूतल, कल तक थे हमारे, आज हुए सफल, तुम्हे क्या पता, नही तुम्हे अक्ल । हर किसी के काम में न दो तुम दखल, खट्टे हैं अंगूर तुम खाओ और कोई फल, जब न मिले फल तो पियो सिर्फ जल, तुम क्या मानोगे नही तुम्हे अक्ल। जीवन हो प्रेम भरा वातावरण निर्मल, मधुर हो रिश्ते, सुगन्धित और शीतल, ईश्वर मेरी प्रार्थना को देना थोडा बल, इन्हें नहीं है थोड़ी सी, इन्हें दो अक्ल।