इतनी मशक्कत कर रहे हैं प्यार में तेरे,

हर दिन ज़रा सँवर रहे हैं प्यार में तेरे।


तूने न रियायत करी कुछ तोड़ने में दिल,

सो हम रोज़ाना मर रहे हैं प्यार में तेरे।


हैं जानते मेरा नहीं है तू मगर ऐ जाँ ,

खोने से तुझको डर रहे हैं प्यार में तेरे।


सादा ही रंगतों का ओढ़े लिबास हम,

तिल-तिल यूँ बिखर रहे हैं प्यार में तेरे।


वाक़िफ ग़म-ए-मोहब्बत दुनिया के चलन से,

फिर भी गुनाह कर रहे हैं प्यार में तेरे।


हर रोज़ देखकर ख़ुद अपना वफ़ा-ए-अक्स,

कुछ ज़्यादा ही निखर रहे हैं प्यार में तेरे।


दरिया-ए-इश्क़ गहरा, खारा, है जानलेवा,

हाँ फिर भी हम उतर रहे हैं प्यार में तेरे।


-स्वरांजलि 'सावन'