दिए बुझे सभी यहां तो अंधकार खा गया
जो घर जले तो रोशनी का ये प्रकार खा गया
कहाँ बचा है आज तक जो इस की जद में आ गया
मियां तुम्हें तो प्यार का वही बुखार खा गया
उड़े उड़े भटक गए कहाँ गए पता नही
वो पंछी जिन के जहन को कफ़स का तार खा गया
कुरेद कर उखाड़ कर कभी कभी तो नोच कर
वो कौन है जो देश को यूं ज़ार ज़ार खा गया


