हमारे कलेजे से आकर लगा है
किनारे से जैसे ये सागर लगा है
हटाओ ना जाने किसे चोट पहुंचे
हमारी सड़क पे जो पत्थर लगा है
जहां पे ये धरती गगन मिल रहे है
किनारा किनारे से मिलकर लगा है
सफर के थके हैं रुके हैं ज़रा सा
तेरी गोद मे हमको जाकर लगा है
कोई तो बताओ ये ग़ालिब को जा कर
हमे भी जमाना सितमगर लगा है


