चलो इन बारिश की बूंदों से इक यादों की माला पिरोते हैं,चलो इक बार फिर एक दूजे के होते हैं।स्वप्निल
चलो इन बारिश की बूंदों से इक यादों की माला पिरोते हैं,चलो इक बार फिर एक दूजे के होते हैं।
स्वप्निल