रिटायरमेंट फंड हिलोरें ले रहे थे आज जज़्बात क्यों न हो,खुशी की थी ही बात रिटायरमेंट फंड आज हाथ आया था ओवरटाइम कर कर जो जमाया था शर्मा जी की तो बस आँखें भर आई कुछ को रोका तो कुछ को छलकाईं साथ जाग उठे सब सोये अरमान पूरा अब करने का देने लगे फरमान आधा बाँट दूँगा बच्चों में अपने आधा से पूरे करूँगा सारे सपने भारत भ्रमण की इच्छा पूरी होगी वैष्णव माता से ना अब दूरी होगी नियति मुस्कुरा रही थी देख शर्मा जी को पाठ पढ़ाना बाकी रह गया जैसे कोई हो बहुत कुछ अभी उनको देखना बाकी था अपने बच्चों से ही कुछ सीखना बाकी था वृद्धाश्रम नया जो सरकार ने बनवाया था नाम उनका पहले ही वहाँ लिखवाया था देरी थी तो पूरा फंड हाथ में आ जाने की आतुरता भी जल्द वहाँ उन्हें पहुँचाने की कल से शर्मा जी का वही घर होगा साथ सिर्फ मायुसी का हर पहर होगा गुजरा जीवन जिनकी खुशियाँ कमाने में अधीर वही,आज उनकी नोच खाने में ...उनकी नोच खाने में #प्रयास