गलतियाँ करता रहा बार बार मैं
जब छोटा था
मेरी हर गलतियों को
औरों से छुपाती आई "माँ"
दुनिया से लड़ती
हर पल मेरे लिए
चेहरे पर शिकन लेकिन
न कभी दिखाई "माँ"
जीवन कि राह
निर्भय चल सकता हूँ अब
पकड़ उँगली चलना
बचपन में जो सिखाई "माँ"
सपने मेरे हैं
आसमाँ से ऊँचे आज
न जाने कितने सपने मेरे
सच कर दिखाई "माँ"
दुनिया कि हर ठोकर
खाने कि रखता हूँ हिम्मत
हर ज़ख्म की मेरे,
है पता बस दवाई "माँ"
जो भी तरक़्क़ी
अब तक कर पाया मैं
हर तरक़्क़ी के कारण में
समाई "माँ"
फिर से कमा सकते हैं
धन दौलत गवाँ कर
ममता कि दौलत कैसे कमाये
आज जिसने गँवाई "माँ"
तेरे दूध का मोल
न जानू मैं
बस जानू इतना के
न कर पाऊंगा कभी भरपाई "माँ"