#कंकर
भूख से व्याकुल हो
कई दिनों से कोई
और उसे मिल जाये
मंदिर के दरवाजे से
चुटकीभर प्रसाद तो
मिल जाती है उसे
कुछ और साँसें
इसी बहाने।
पर
प्रसाद में हो कंकर
छोटा सा जो दाँतों
के बीच आ जाये
और वह भूखा
प्रसाद को कोसे
तो उससे बड़ा
मूर्ख दुनिया में
नहीं कोई।
दुनिया में मेरे,जो थी
निश्छल प्रेम से वंचित,
तुम आयी हो बनकर
उसी प्रसाद की तरह
जो दे रही है कारण
मुझे,कुछ वक़्त और
जीने का।
क्या हुआ जो हो तुम
थोड़ी सी अलग
मेरी कल्पनाओं से।
मैं वह भूखा मूर्ख
नहीं
प्रिये।
#प्रयास