लड़कियां उम्र से पहले ही बड़ी हो जाती है
वो भांप लेती है तुम्हारी गलत नजरें,
जानती है तुम्हारे इशारे फिर भी चुपचाप गुजरें,
बचपन से ही उन्होंने सब महसूस किया है,
न जाने उन्हें किन किन हाथों ने छुआ है,
कभी पड़ोस का तो कभी कोई घर का ही होता है,
यह उस उम्र में होता है जब उन्हें कुछ पता नहीं होता है,
सब सीख कर कभी कठोर कभी कमजोर हो जाती है,
लड़कियां उम्र से पहले ही बड़ी हो जाती हैं,
कभी किसी बात का भय होता है,
या फिर उन्हें पता ही नहीं होता है,
वो बोल नहीं पाती हैं अपनी बातें,
कहने को होता है बहुत कुछ, बहुत होती है शिकायतें,
ना जाने कैसे-कैसे खुद को रोकती हैं,
अकेले में रोती हैं और बहुत सोचती हैं,
वो खुद ही खुद की गुनाहगार हो जाती हैं,
लड़कियां उम्र से पहले ही बड़ी हो जाती हैं,
चंचल मन उसका फिर उदास रहता है,
हर चेहरा उसे हवस की प्यास लगता है,
नफरत करती हैं वो समाज से और खुद से,
चिड़चिड़ी हो जाती हैं लड़ते हुए अपने वजूद से,
बचपन ऐसे ही न जाने कब गुजर जाता है,
समय से पहले ही उन्हें सब समझ आ जाता है,
फिर चेहरे पर नकली मुस्कान सजाती हैं,
लड़कियां उम्र से पहले ही बड़ी हो जाती हैं!
~ सूर्यांश 'अधीर'


