प्रकृति के उस छोर पर
जहाँ व्यक्ति खुद ही खुद का विश्लेषण करता है ।
मैं अक्सर उस छोर पर जाया करता हूँ,
जब कोई नहीं संग मेरे,
तब मैं उन यादों को बुलाया करता हूँ,
मैं अक्सर उस छोर पर जाया करता हूँ ।
कोलाहल भरी मेरी ये जिन्दगी से,
कोई बहाना यु बनाया करता हूँ,
मैं अक्सर उस छोर पर जाया करता हूँ ।
जिन्दगी के कुछ पल यु ही बीताया करता हु
खुद ही के संग बिताया करता हूँ ।
जो बीत चुकी है बातें को यु याद करता हु ,
उनको गुनगुनाया भी करता हूँ,
मैं अक्सर उस छोर पर जाया करता हूँ ।

