तुमने जितना कहा उससे कहीं ज़्यादा मैंने सुना
अपने उन रिश्तो से ज्यादा ही तुम्हे मैंने चुना
मैंने सुना वो जो तुमने मुझसे कहा ही नहीं
बातों के बीच की खामोशी में दबी हुई
" मन की आँधी " सा कुछ जो धीरे धीरे तेज होती
तुम्हारी वो उन धड़कनों का वो राग
कभी तुमने सुनी मेरी
इन आँखों की उन गुस्ताख़ सी हँसी को
और क्या कभी तुमने सुनी मेरे लबों पर
दबे वो ग़म के अधपढे से ख़त कई ...

