टूटी चप्पल
जमाने ने
मुझसे पूछा,
तुम्हारे चप्पल
इतनी बुरी तरह क्यों टूटे हैं?
जमाने ने
जमाने से यह नहीं पूछा
कि यह नयी वाली सड़क क्यों टूटी है!
चप्पल और सड़क का रिश्ता
केवल मंजिल तक जाने का
यात्रा वृत्तांत नहीं होता।
उसमें होती हैं
जीवन की
असंख्य कहानियाँ
और
अनेकों महाकाव्य।
मंज़िल तो
पैरों से ही तय होती है पर
चप्पल की भूमिका भी
बड़ी होती है।
पैरों में चुभने से पहले,
चुभता है हर काँटा उसी में
और वह हमारी बोझ तले
उफ़ भी नहीं करती।
क्योंकि उसे पता है
वह चप्पल है, और
हम उसके भरोसे।

