महलों के जो अमीर थे, बरबाद  हो गए जंगल में हम फ़कीरी से आबाद हो गए  ! दोस्त में, दुश्मन में, कहाँ फ़र्क रहा अब, दिल की बुरी हर सोच से आज़ाद हो गए  ! भर भर दिए इंसान को कुदरत ने ख़ज़ाने, संभाले नहीं इंसान ने, बरबाद हो गए  ! छीना था राज राम से कैकयी ने तो उसके, सपने भरतमिलन से सब बरबाद हो गए  ! आये थे जब जहान में नाशाद थे बहुत, जाते हुए अल्लाह कसम, शाद हो गए  ! कैसे बचेगा लुटने से अब घर तेरा "सूरज", डाकू जो थानेदारों के दामाद हो गए  !