
महलों के जो अमीर थे, बरबाद हो गए
जंगल में हम फ़कीरी से आबाद हो गए !
दोस्त में, दुश्मन में, कहाँ फ़र्क रहा अब,
दिल की बुरी हर सोच से आज़ाद हो गए !
भर भर दिए इंसान को कुदरत ने ख़ज़ाने,
संभाले नहीं इंसान ने, बरबाद हो गए !
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