उनका हर इक फ़रेब जवानी पे आ गयाबहते हुए दरिया की रवानी को खा गया,है अब कहां जो चार सौ में भी न ले सकेदेखो सिलेंडर सात सौ के पार आ गया ।सूरज प्रकाश
उनका हर इक फ़रेब जवानी पे आ गयाबहते हुए दरिया की रवानी को खा गया,
है अब कहां जो चार सौ में भी न ले सकेदेखो सिलेंडर सात सौ के पार आ गया ।
सूरज प्रकाश